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श्रीमती वसुन्धरा राजे जी
माननीय मुख्यमंत्री,राजस्थान सरकार
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राजस्थान सरकार

बाल अधिकारिता विभाग

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श्री अरुण चतुर्वेदी
माननीय मंत्री ,सान्याअवि राजस्थान सरकार

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राजस्थान सरकार

बाल अधिकारिता विभाग

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श्रीमती वसुन्धरा राजे जी
माननीय मुख्यमंत्री,राजस्थान सरकार
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श्री अरुण चतुर्वेदी
माननीय मंत्री ,सान्याअवि राजस्थान सरकार

समेकित बाल संरक्षण योजना (आई.सी.पी.एस.)

भारत सरकार द्वारा 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत बाल संरक्षण हेतु व्यापक ढांचा तैयार कर बच्चों हेतु सुदृढ़ संरक्षित परिवेश तैयार करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्मोकित बाल संरक्षण योजना आई.सी.पी.एस.लागू की गई है। इस योजना के प्रभावी -क्रियान्वयन से निम्न  की उद्देश्यों पूर्ति हो सकेगी:-

1.            संकटग्रस्त बच्चों हेतु उपलब्ध सेवाओं एवं आव’यकताओं का आंकलन कर व्यवस्था निर्माण करना।

2.            राज्य/जिला/ब्लॉक/ग्राम स्तर पर बाल संरक्षण संस्थाओं की स्थापना एवं संचालन करना।

3.            बाल संरक्षण सेवाओं का सुदृृढि़करण तथा इनकी पंहुच एवं गुणवत्ता में सुधार करना।

4.            बच्चों को संस्थागत देखभाल के अतिरिक्त गैर संस्थागत परिवार आधारित देख-रेख विकल्पों को मजबूत करना और बढ़वाा देना।

5.            सेवा प्रदाताओं की क्षमतावद्वर्न, ज्ञान, जागरूकता करना।

6.            साक्ष्य आधारित निगरानी एवं मूल्यांकन एवं सेवा नियोजन निर्णय लेने हेतु वेब आधारित डाटाबेस तैयार करना।

7.            निगरानी एवं मूल्यांकन करना।

8.            सभी स्तर पर बाल संरक्षण हेतु भागीदारी बढ़नाा।

9.            अन्य निकायों/संबं-िधत विभागों/संस्थाओं के साथ समन्यवय बनाना।

राज्य में योजना का -क्रियान्वयन करने के लिए भारत सरकार व राज्य सरकार के मध्य दिनांक 06.01.2010 को अनुबंध पत्र निष्पादित किया गया, जिसमें विभीन घटकों को समयबद्ध क्रियान्वित करने के लिए योजना का प्रारूप्ा तैयार किया जा कर -क्रियान्वयन किया जा रहा है। उक्त एम.ओ.यू. में निर्धारित मापदण्डों के अनुसार योजनान्तर्गत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के प्रभावी – क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा वि-िभन्न नियमित पदों का सृृजन किया जा चुका है जिनके तहत कुछ पदों को भरा गया है। योजनान्तर्गत निम्न संस्थाऐं/कार्य किये गये हैं:-

राजस्थान स्टेट चाइल्ड प्राेटेक्शन सोसायटी :

समेकित बाल संरक्षण योजना के प्रावधानानुसार योजना के – क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तर पर राजस्थान स्टेट चाइल्ड प्राेटेक्शन सोसायटी की स्थापना कर दी गई है। यह सोसायटी राज्य में वि-िभन्न बाल संरक्षण कार्यक्रमों/कानूनों/नीतियों के क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है। इस सोसायटी के अध्यक्ष के रूप में प्रमुख शासन सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में विभाग के निदेशक है। सोसायटी एवं विभाग की गतिवि-िधयों के प्रभावी संचालन एवं बाल संरक्षण विषयों पर यूनीसेफ, राजस्थान द्वारा तकनीकी एवं वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है।

राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी :

राज्य में स्वदेशी दत्तक ग्रहण को प्राेत्साहन देने व अन्तरदे’ाीय दत्तक ग्रहण के विनियमन, राज्य स्तर पर प्रवर्तकता, पालन पोषण देखरेख सहित परिवार आधारित गैर संस्थागत कार्यक्रम के प्राेत्साहन-कार्यान्वयन-पर्यवेक्षण-निगरानी हेतु राजस्थान सरकार द्वारा राज्य स्तर पर ”राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी ”सारा” की स्थापना की गई है। निदेशक, बाल अधिकारिता इस एजेंसी में सचिव के रूप में कार्यरत् है।

जिला बाल संरक्षण इकाई :

योजनान्तर्गत राज्य के समस्त 33 जिलो में ”जिला बाल संरक्षण ईकाई” की स्थापना का बाध्यकारी प्रावधान किया गया है। इकाई का कार्य जिला स्तर पर बाल संरक्षण कार्यक्रमों के प्रभावी कियान्वयन एवं निगरानी सुनि-ि’चत करना, जोखिम-देखभाल-संरक्षण वाले बच्चों के लिए वैयक्तिक देखरेख कार्यØम बनाना, आईसीपीएस के कार्यØम/घटकों के कार्यान्वयन हेतु प्रति-िष्ठत संगठनों को चि-िन्हत कर समर्थन देना, प्रवर्तकता-पालन पोषण देखरेख-दत्तक ग्रहण-अनुवर्ती देखरेख सहित परिवार आधारित गैर संस्थागत सेवाओं के कियान्वयन में सहयोग करना आदि है। इकाई पर समग्र प्र’ासानिक नियंत्रण जिला कलक्टर का है। राजस्थान स्टेट चाईल्ड प्राेटेक्शन सोसायटी की जिला शाखाओं के रूप्ा मे दिनांक          25.06.2011 के जरिये प्रत्येक जिले में ”जिला बाल संरक्षण ईकाई” की स्थापना की गई है।

प्रोजेक्ट स्वीकृति समिति :

समेकित बाल संरक्षण योजना के प्रावधानानुसार स्वंयसेवी संस्थाओं के प्रस्तावों की जांच एवं उनकी पंजीयन/अनुदान के संबंध में निर्णय लेने हेतु प्रमुख शासन सचिव एवं अध्यक्ष राजस्थान स्टेट चाइल्ड प्राेटेक्शन सोसायटी की अध्यक्षता में प्राेजेक्ट स्वीकृति समिति गठित की गई है।

ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति :

विभाग के आदेश क्रमांक 349 एवं 348 दिनांक 04.12.2012 द्वारा राज्य में ब्लॉक स्तरीय बाल संरक्षण समिति एंव ग्राम पंचायत स्तरीय बाल संरक्षण समिति का गठन किया गया है, जिसके माध्यम से बाल संरक्षण से जुड़े मुद्दों को सामुदायिक स्तर पर -क्रियान्वयन एवं जागरूकता उत्पन्न करना है।

उक्त के अतिरिक्त योजनान्तर्गत बाल गृहों के सुदृढ़ीकरण हेतु संबंधित घटकों हेतु बाल संरक्षण मुद्दों पर आमुखीकरण तथा प्रचार-प्रसार इत्यादि कार्य किये गये हैं।

चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम परियोजना :

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा निर्मित वेबसाइट चाइल्ड ट्रैक सिस्टम परियोजना www.trackthemissingchild.gov.in/trackchild/index.php का संचालन किया जा रहा है जिसका मुख्य उद्देश्य समेकित बाल संरक्षण योजनान्तर्गत कार्यरत् घटकों बाल कल्याण समिति,किशोर न्याय बोर्ड/बाल गृहों /जिला बाल संरक्षण इकाई/संबंधित विभागों द्वारा डाटा संधारण व निगरानी करना है। विभाग द्वारा जिला स्तर पर सबंधित घटक, किशोर न्याय बोर्ड, बाल कल्याण समिति, विशेष किशोर पुलिस इकाई बाल गृहों एवं जिला बाल संरक्षण इकाई को आँन लाइन डाटा संधारण व निगरानी किये जाने हेतु प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

उक्त घटकों द्वारा प्राप्त प्रकरणों के डाटा संधारण में प्रगति प्रदान करने के लिए विभाग द्वारा हिन्दी में मैन्युअल, निर्मित कर जारी किया जा गया है। जिससे कि निगरानी में सहयोग मिल सकें। इस परियोजना में ने’नाल इन्फोर्मेटिक सेन्टर, राज. जयपुर के पिंसिपल सिस्टम एनालिस्ट को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

केयरिंग वेबसाइट:-

राज्य में संचालित समस्त 33 राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण एजेंसियों एवं 4 गैर राजकीय विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण एजेंसी को विभाग द्वारा यूजरआई एवं पासवर्ड उपलब्ध करा दिये गये है व वर्तमान में दत्तक ग्रहण के इच्छुक माता-पिता हेतु कारा नई दिल्ली की केयरिंग वेबसाइट www.adoptionindia.nic.in  पर आँन लाइन आवेदन किये जाते है।

चाईल्ड हेल्प लाईन -1098

देखरेख और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के लिए 24 घंटे नि:शुल्क आपातकालीन पहॅुच सेवा है, जो कठिनाईयों से घिरे/पीडि़त/उपेक्षित/लावारिस/प्रताडि़त बच्चें तक पहॅुचकर उसे आपातकालीन राहत देकर आगामी पुनर्वास के लिए सम्ब-िन्धत सेवाओं से जोड़ती है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के आर्थिक संसाधनों व चाईल्ड लाईन इंडिया फाउण्डे’ना, मुम्बई के मार्गद’ार्न में स्वंयसेवी संस्थाओं के माध्यम से वर्तमान में यह योजना राज्य के 13 शहरों में संचालित है। चालू वित्तीय वर्ष में राज्य के तीन नवीन जिलों का विस्तार प्रस्तावित है।