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श्रीमती वसुन्धरा राजे जी
माननीय मुख्यमंत्री,राजस्थान सरकार
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राजस्थान सरकार

बाल अधिकारिता विभाग

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श्री अरुण चतुर्वेदी
माननीय मंत्री ,सान्याअवि राजस्थान सरकार

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राजस्थान सरकार

बाल अधिकारिता विभाग

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श्रीमती वसुन्धरा राजे जी
माननीय मुख्यमंत्री,राजस्थान सरकार
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श्री अरुण चतुर्वेदी
माननीय मंत्री ,सान्याअवि राजस्थान सरकार

विज़न,मिशन और मैंडेट

पृष्ठभूमि

देश की 39 प्रतिशत आबादी 0-18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं। राजस्थान में यह संख्या 43.6 प्रतिशत है। भारतीय संविधान तथा अंतर्राष्ट्रीय दायित्वो का सम्मान करते हुए केंद्र और राज्य सरकारें सभी बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए लगातार प्रयास करती रही हैं। 1992 में भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार संधि (सीआरसी) पर किए गए हस्ताक्षर से बाल अधिकारों के प्रति देश की प्रतिबद्धता को  और मज़बूती मिली।

बाल अधिकार संरक्षक के रूप में भारत सरकार की भूमिका को समझते हुए राजस्थान सरकार ने भी  राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय दायित्वो के अनुपालन की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इन प्रतिबद्धताओं के पालन एवं क्रियान्वयन से संबंधित समस्याओं एवं चुनोतियों से जूझने के लिए समुचित नियमन एवं निगरानी व्यवस्था तथा समन्वय स्थापित करना बहुत आवश्यक है। इसलिए पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने बच्चों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए आवश्यक संस्थागत आधार के सुदृढ़ीकरण तथा नीति एवं कार्यक्रम सम्बन्धी प्रयासों में भारी निवेश किया है।

2008 में राजस्थान सरकार ने एक पृथक राज्य बाल नीति तैयार की। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विभिन्न राजकीय विभागों के बीच समन्वय के जरिए विकास के सभी मदों में बच्चों के अधिकारों का समावेश ह¨ और उनका व्यापक विकास तथा संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। लड़कियों के जीवन में मौजूद असुरक्षाओं को दूर करने के लिए 2013 में राजस्थान राज्य बालिका नीति तैयार की गई। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य स्तरीय बालिका देखभाल एवं सुरक्षा टास्क फोर्स का भी गठन किया गया। 23 फरवरी 2010 को स्वाधीन एवं वैधानिक संस्था के रूप में राजस्थान राज्य बाल अ-अधिकार संरक्षण आयोग का गठन हुआ ताकि वह बच्चों से सम्बंधित कानूनों और नीतियों के -क्रियान्वयन की समीक्षा और निगरानी कर सके। नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009; बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006; किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2000; तथा बाल श्रम (निषेध एवं नियमन) अधिनियम, 1986 आदि बाल केन्द्रित कानूनों को सही ढंग से लागू करने के लिए समय-समय पर कई कार्य योजनाएं, दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल भी जारी किए गए।

 

विभिन्न नीतियों, कार्य योजनाओं, दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल तथा सम्बंधित संस्थाओं की स्थापना के चलते एक ऐसी व्यापक प्रशासकीय इकाई की आवश्यकता महसूस की गई जो बच्चों से सम्बंधित अभिशासन को  नियमित और मज़बूत कर सके। अत: 17 मई 2013 को जारी अधिसूचना के माध्यम से समेकित बाल संरक्षण योजना, पालनहार योजना, मुख्यमंत्री हुनर विकास योजना और अन्य बाल संरक्षण सम्बंधित कार्यक्रमों को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से अलग करते हुए बाल अधिकारिता विभाग का पृथक रूप से गठन हुआ। यह विभाग राज्य में बाल अधिकारों के संवर्घन एव संरक्षण के लिए जि़म्मेदार होगा

विज़न

राष्टªीय बाल नीति, 2013 एवं राज्य बाल नीति, 2008, अठारह ¼18½ वर्ष से कम उम्र के सभी व्यक्तियों को बच्चा मानती है। राजस्थान सरकार बच्चों को समान नागरिक तथा अ-िèकारा èाराक के रूप में मान्यता देती है ताकि उन्हें समाज के स-िØय, स्वस्थ व्यक्तियों के रूप में उचित स्थान मिल सके और उनकी गरिमा एवं सम्मान को सुरक्षित रखा जा सके। इसके लिए यह भी आवश्यक है कि वे अपनी पूर्ण संभावनाओं और क्षमताओं को साकार करने में समर्थ हों, किसी भी तरह की क्षति, उत्पीड़न से सुरक्षित रहें और उनकी मूलभूत और महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की अनदेखी न हो।

 

अपने इस विज़न की पूर्ति हेतु बाल अधिकारिता विभाग बच्चों, उनके समुदायों, सामाजिक संगठन¨, संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों , कॉरपोरेट क्षेत्रो और सम्बंधित व्यक्तियों के साथ एक समीक्षात्मक एवं प्रभावी भागीदारी की परिकल्पना करता है।

मिशन

बाल अधिकारिता विभाग का मिशन है -

बाल अधिकार तथा अभिशासन की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की प्रक्रिया में राजस्थान सरकार ने बच्चों तक उनके कानूनी अधिकारों को  पहुँचाने के निरन्तर प्रयास किए हैं; परन्तु सभी बच्चों के सभी अधिकारों की बहाली और सुरक्षा आज भी एक चुनौती बनी हुई है। अत: इस नवगठित विभाग के बुनियादी ढांचे और मानव संसाधन में निवेश करके उसे मज़बूत करना आवश्यक है ताकि बच्चों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों व सेवाओं के नियोजन और -क्रियान्वयन में और सुधार लाया जाए, बाल संरक्षण में दक्ष व्यक्तियों का कैडर बनाया जाए, इस कार्य में सरकारी व गैर-सरकारी कार्यक्रमों और अभिकरणों में समन्वय स्थापित किया जाए, बच्चों और उनके परिवार के लिए स्तरीय सेवाओं का प्रोत्साहन, प्रावधान और समन्वय सुनिश्चित हो  तथा अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए उठाए गए सभी कदमों के प्रभावों का आकलन किया जाए।

अपने विज़न और मिशन की पूर्ति के लिए विभाग देश के बाल नागरिकों को प्रदान किए गए संवैधानिक आश्वासनों से बंधा हुआ है और विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयासरत है कि राज्य के किसी भी बच्चे के साथ कोई भेदभाव न हो और बच्चों के जीवन से सम्बंधित सभी सवालों पर उनके श्रेष्ठतम हितों को सबसे पहली प्राथमिकता दी जाए।

दायित्व/अधिदेश

बाल अधिकार विभाग के दायित्व/का अधिदेश इस प्रकार है-

 

बाल अधिकार संरक्षक

•             राष्ट्रीय बाल नीति, 2013, राज्य बाल नीति 2008, राजस्थान बालिका नीति 2013 तथा समय-समय पर निर्धारित बाल संरक्षण सम्बंधित नीतियों के क्रियान्वयन के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में काम करना;

•             राष्ट्रीय बाल नीति, 2013 के अनुसार राज्य समन्वय एवं कार्यसमूह (स्टेट कोर्डिनेशन एण्ड ऐक्शन ग्रुप) की स्थापना में योगदान देना;

•             राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग का सुदृढ़ीकरण करना ताकि वह अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वाह कर सके;

•             बाल अधिकार संधि (सीआरसी), कन्वेंशन आँन ऐलिमिनेशन आँफ आँल फॉम्र्स आँफ डिस्क्रिमिनेशन अगेंस्ट वीमेन (सीडॉ), एमडीजी तथा 2015- पश्चात एमडीजी एजेंडा और बच्चों के अधिकारों से सम्बंधित अन्य अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं पर राज्य की ओर से विभिन्न सरकारी विभाग एवं सिविल सोसाइटी के परामर्श से रिपोर्ट तैयार करना एवं भारत सरकार की रिपोर्ट में योगदान देना;

•             हाशिए पर रहने वाले तथा संवेदनशील -स्थितियों में ग्रस्त बच्चों पर ध्यान केंदित करते हुए विशिष्ट कार्यक्रमों और प्रयासों का संचालन करना जैसे बालिकाएं, विमुक्त जाति (डीनोटीफाइड) एवं घुमंतू परिवारों के बच्चे, विकलांग बच्चे, बाल मज्दाूर, परिवार विहीन और निराश्रित बच्चे, यौन उत्पीड़न व मानव व्यापार के शिकार बच्चे, भीख मांगने वाले बच्चे, सेक्स वर्कर्स के बच्चे, एचआईवी/एड्स से प्रभावित बच्चे, प्राकृतिक आपदा तथा अन्य आपातकालीन -स्थितियों से प्रभावित बच्चे विकास सम्बन्धी विस्थापन से प्रभावित बच्चें, सीमाप्वर्ती क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे, इत्यादि;

•             बाल अधिकारों से सम्बंधित कार्यक्रमों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश, प्रोटोकॉल और पारदर्शिता मानक निर्धारित करके अभिशासन प्रक्रिया को बच्चों के प्रति जवाबदेह बनाना;

•             बाल अधिकारों को सभी स्थानीय निकायों, लाइन महकमों, और समाज की विकास कार्यसूची के केंद्र में लाना; तथा

•             परिवारों, समुदायों त्ाथा बच्चों की देखभाल व संरक्षण के लिए जिम्मेदार अन्य एजेंसियों व निकायों का सुदृढ़ीकरण करना।

नीति निमार्ण, समीक्षा, संशोधन एवं वकालत

 

•             विभिन्न श्रेणियों और समूहों के बच्चों की खास जरूरतों के अनुसार नीतियां तैयार करना, जिनमें विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों तथा सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं भौगोलिक रूप से अतिसवंदनशील तबके के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाए;

•             राज्य के प्रत्येक बच्चे के सभी अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनों और नियमों का सुदृढ़ीकरण करना जिसमें मौजूदा कानूनी रूपरेखा की समय- समय पर समीक्षा, नए कानूनों का निर्माण और आवश्यकता के अनुसार मौजूदा कनूनों में संशोधन भी शामिल है;

•             बच्चों से सम्बंधित राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक नीतियों तथा पंचवर्षीय योजनाओं में व्यक्त की गई प्रतिबद्धताओं के आधार पर राज्य, जिला तथा प्रशाशन के अन्य स्त्रोतों पर समेकित बाल कार्य योजनाओं का निर्धारण व -क्रियान्वयन करना;

•             कार्यक्रम सम्बन्धी हस्तक्षेपों, सेवा वितरण, संस्था निर्माण, शोध तथा बाल अधिकार सम्बन्धी प्रयासों के मूल्यांकन व निगरानी के लिए नैतिक एवं सामाजिक मानक स्थापित करना;

•             बच्चों के साथ सम्पर्क में आने वाले सभी सेवा प्रदाताओं, मीडिया, परिवारो, सिविल सोसाइटी और अन्य निर्वाहकों एवं जिम्मेदार संस्थाओं के लिए बाल-मैत्रिक संकेतकों की स्थापना करना तथा सेवाओं की गुणवत्ता को बढाने के लिए मानदंडो और मानकों का विकास, समीक्षा एवं संशोधन करना;

•             बाल अधिकारों का अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु बच्चों के लिए सेवाएं प्रदान करने वाली एजेंसीयों, संस्थाओं और संगठनों की आधिकारिक मान्यता के लिए क्रियाविधि विकसित करना; तथा

•             बच्चों से सम्बंधित राजकीय, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन में सुधार के लिए बाल अधिकारों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रोटोकॉल, दिशा-निर्देश तथा मानक -क्रियान्वयन प्रणाली विकसित करना।

ज्ञान केंद्र

•             नीति निर्माताओं,योजनाकारों, सरकार एंव गैर सरकारी संगठन और सिविल सोसायटी द्वारा बच्चों की स्थिति और संवेदनशीलता को  संबोधित करने तथा उनके प्रति समाज को लगातार शिक्षित एवं जागरूक करने के लिए नियमित रूप से ज्ञान एवं सहायता आधार तैयार करना और समय  समय पर उसका अद्यतन;

•             राज्य और केंद्रीय एजेंसियों के सहयोंग से राज्य में बच्चों और उनके अधिकारों पर जनगणना प्रारंभ करना तथा उसे संस्थागत रूप देना;

•             राजस्थान में बाल सुरक्षा की स्थिति पर एक वार्षिक रिपोर्ट एवं नियमित रूप से अद्यतन करने के लिए बाल संरक्षण संकेतको पर डेटा सेट तैयार करना;

•             बच्चों के अधिकारों से संबधित मुद्दों पर शोध, सर्वेक्षण, मूल्यंकान एवं लेखन संचालित करना तथा नियमित रूप से इसी प्रकार के अन्य प्रयासों और उनके परिणामों का विश्लेषण तथा परितुलना करना;

•             स्कूली पाठ्यचर्या में बाल अधिकारों का समावेश करना और स्कूलों व उच्च शिक्षा संस्थानों को राज्य में बाल अधिकारों की स्थिति पर शोध अध्ययन करने के लिए प्रोत्साहित करना;

•             बच्चों के लिए एक स्वास्थ्य एवं सुरक्षित जीवन की ज़रूरत क¨ केंदित करते हुए उच्च प्रभावी, किफायती हस्तक्षेप और रणनीतियों के क्षेत्रा में हो रहे नए प्रयासों को प्रोत्साहन देना;

•             चाइल्ड ट्रैकिंग सिस्टम विकसित करना;

•             कार्यक्रमों की आवश्यकता के अनुसार उनके परफॉमेस/निष्पादन बजट और रिपोर्ट्स तैयार करना; तथा

•             बाल अधिकारों के विभिन्न आयामों पर सेमिनार, कार्यशालाओं एवं सवांद का आयोजन करना।

क्षमतावर्धन

•             बाल सुरक्षा के क्षेत्रा में विशेषज्ञों का कैडर तैयार करना;

•             अभिशासन के विभिन्न स्तरों पर विभिन्न बाल अधिकारों से सम्बंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षण एवं क्षमता सम्बन्धी आवश्यकताओं का आकलन करना;

•             जागरूकता और संवेदीकरण के लिए प्रशिक्षण एवं आईईसी सामग्री तैयार करना;

•             बाल अधिकारों को साकार करने के लिए विभिन्न कानूनों, नीतियों, कार्य योजनाओं, कार्यक्रमों और योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी व्यक्तियों व संस्थाओं के प्रशिक्षण, संवेदीकरण, ओरिएंटेशन तथा क्षमतावर्धन में निवेश करना;

•             बाल अधिकार एवं बाल संरक्षण पर विशेष प्रशिक्षण मॉडयूल और रिफ्रेशर कोर्स विकसित करना तथा बाल संरक्षण के मुद्दों पर प्रत्यक्ष रूप से कार्यरत सरकारी और गैर-सरकारी कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण प्रदान करने वाले विशेष प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना;

•             प्रशिक्षण संस्थानों तथा विशेषज्ञों के साथ समन्वय करना और प्रशिक्षण सम्बन्धी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर संसाधन विकसित करना;

•             उच्च् शिक्षा में बच्चों के अधिकारों और संरक्षण से सम्बंधित विशिष्ट पाठ्य्क्रमों के समावेश को सुगम बनाना; तथा

•             राज्य न्यायिक अकादमी, पुलिस अकादमी, राज्य और जिला विधिक् सेवा प्राधिकरण, राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग तथा बाल अधिकारों के संरक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस तरह के अन्य प्रशिक्षण संस्थानों एवं संविधिक निकायों में बाल अधिकारों एवं बाल संरक्षण पाठ्यक्रमों की स्थापना को सुगम बनाना।

नियोजन एवं क्रियान्वयन

•             समेकित बाल संरक्षण योजना (आईसीपीएस), किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम 2000, लैंगिक आपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम, (पॉक्सो) 2012,बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006; बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005, अभिभावक एंव वॉड्र्स अ-िèानियम, 1890, तथा अन्य बाल सुरक्षा संबंèाी कानूनांे, नीतियों व कार्यक्रमों (से जुड़े मुद्दों पर प्रत्यक्ष -क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालना) के नियोजन व क्रियान्वयन के लिए एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करना;

•             बच्चों से संबंधित परिणामों की प्राप्ति और समन्वय के लिए एक बहुक्षेत्रीय कार्ययोजना तैयार करना;

•             बच्चों से सम्बन्धित कार्यक्रमों के नियोजन व क्रियान्वयन के लिए आवश्यकता आधारित, समता-केन्द्रित तथा लैंगिक रूप से सवेंदनशील उपायों में निवेश करना;

•             बच्चों के लिए, विशेष रूप से बालिकाओं, विकलांग बच्चों तथा समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों के बच्चों कि लिए संचालित कार्यक्रमों की पहुँच, गुणवत्ता तथा विस्तार में सुधार लाना;

•             बाल अपराधों तथा अन्य बाल संरक्षण सम्बंधित मुद्दों को सम्बंधित करने के लिए निरोधक रणनीतियों के विकास और क्रियान्वयन पर ध्यान केंदित करना;

•             देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों के लिए गैर संस्थागत देखभाल में निवेश करना;

•             बच्चों के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए जिले में विशेष बाल न्यायालयों की स्थापना सुनिश्चित करना;

•             हर थाना स्तर एवं जिला स्तर पर बच्चों के लिए विशेष पुलिस इकाई (SJPU) में बाल संरक्षण सेवाऐं प्रदान करने के लिए समर्पित और शिक्षित पुलिस अधिकारियों के कैडर की स्थापना करना; तथा

•             सभी स्तरों पर बच्चों के लिए प्रभावी एवं बेहतर अभिशासन सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न नीतियों व कार्यक्रमों के -क्रियान्वयन में विकेंद्रीकरण को प्रोत्साहित करना।

निगरानी व्यवस्था/पर्यवेक्षण व्यस्था/निरीक्षण व्यस्था

 

1     विभिन्न मदों में विश्लेषण, निगरानी एवं रिपोर्टिंग

•             आर्थिक आवंटन, व्यय एवं परिणामों के सर्वाधिक विश्लेषण के लिए चाईल्ड बजटिंग करना;

•             प्रदर्शन और प्रगति को मापने के लिए मूल संकेतक निर्धारित करना;

•             बाल संरक्षण के अनुपालन को मापने के लिए बेसलाईन तथा वार्षिक स्कोर कार्ड तैयार करना;

•             विभिन्न कार्यक्रमों की प्रगति को मापने तथा नियोजन व क्रियान्वयन में सुधार के लिए अभिनव पद्धतियां विकसित करना, जैसे चाइल्ड ट्रैकिंग व्यवस्था/सिस्टम, जिला स्तरीय बाल अधिकार सूचकांक, सामाजिक परीक्षण आदि; तथा

•             बाल अधिकारों के संरक्षण से सम्बंधित सभी नीतियों, कानूनों, कार्यक्रमों तथा योजनाओं का मूल्यांकन अध्ययन एवं बाल अधिकार प्रभाव आंकलन, सामयिक विश्लेषण, अèययन व आँडिट करना।

2     परामर्श एवं समन्वय प्रणाली

 

•             राज्य, जिला और ग्रामीण स्तर पर तकनीकी सहायता समूह तथा सलाहकार एवं समन्वय तंत्र की स्थापना करना जिसमें सरकार और गैर-सरकारी अभिकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित हो

•             राज्य सरकार तथा उसके सम्बंधित विभागों को स्थानीय अभिशासन व्यवस्था, नीतियों व पर्क्रियाओं में बाल अधिकारों के समावेश के लिए व्यापक मार्गदर्शन एवं परामर्श देना;

•             अभिशासन के सभी स्तरों पर स्थानीय कार्रवाई एवं अंर्तसंस्थागत समन्वय व सहयोग के लिए परिस्थितियां तैयार करना;

•             बाल अधिकारिता विभाग तथा बच्चों से सम्बंधित अन्य कार्यकर्मों के क्रियान्वयन के लिए उत्तरदायी नोडल विभागों के बीच अंतर्विभागीय समन्वय एवं सहयोग की व्यवस्था स्थापित करना जैसे बाल स्वास्थ्य, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल व विकास, शिक्षा, बाल मजदूरी, नशीली दवाओं और मादक पदार्थों के इस्तेमाल, विकलांगता, डेटा प्रबंधन और आंकड़े आदि मुद्दों पर कार्यरत विभाग;

•             विशेष किशोर पुलिस इकाई, जिला बाल संरक्षण इकाईयों, बाल कल्याण समितियों, किशोर न्याय बोर्ड, पोक्सो न्यायालय, जिला बाल संरक्षण अधिकारियों, बाल विवाह निषेध अधिकारियों, चाईल्ड लाइन और बाल संरक्षण के लिए स्थापित इस तरह के अन्य संस्थागत तंत्रों और संरचनाओं के बीच समन्वय और सहयोग सुनिश्चित करना;

•             कठिन परिस्थितियों या संस्थागत देखभाल में पल रहे बच्चों के नाम, राष्ट्रीयता एवं पहचान, स्वास्थ्य, शिक्षा, विकास, उत्थान और सुरक्षा के अधिकारों को सुनिश्चित कराने के लिए स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग, राजस्थान कौशल एंव आजीविका विकास निगम, सांस्कृतिक एवं प्रशिक्षण केंद्र, उदयपुर, जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण के लिए नियुक्त रजिस्टªरा इत्यादि के साथ सहयोग स्थापित करना तथा विभाग के विजन, मिशन एंव अधिदेश को साकार करने के लिए राजकीय एवं स्थानीय एजेंसियों, पंचायती राज संस्थानों, राज्य तथा राज्य के बाहर बच्चों के बीच काम कर रहे सामाजिक संगठनों, मीडिया और विशिष्ट रूप से बच्चों तथा उनके समुदायों के साथ समन्वय, संचार और सहयोग स्थापित करना।

 

3.    बच्चों की सहभागिता को प्रोत्साहन

 

•             आयु आधारित क्षमताओं के अनुसार निर्णय प्रक्रिया में बच्चों की सहभागिता को प्रोत्साहन देना;

•             बच्चों को अपने अधिकारों, कर्तव्यों, कानूनों, नीतियों और कार्यक्रमों को समझने में सहयोग देने तथा उनकी सार्थक भागीदारी को सक्षम करने के लिए उपयुक्त जानकारी की रचना और प्रसार करना;

•             बच्चों के जीवन को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर उनकी सहभागिता को सुगम बनाने के लिए बच्चों की संसद, ग्राम सभाओं या बाल पंचायतों की स्थापना को प्रोत्साहित करना, बच्चों की देखभाल करने वाली संस्थानों में बाल समितियों का गठन करना तथा अन्य ऐसे उपयुक्त मंचों की रचना करना;

•             नेहरू युवक केंद्र, एनसीसी, एनएसएस जैसे मौजूदा मंचों के माध्यम से बच्चों की सहभागिता को मजबूत और प्रोत्साहित करना;

•             बच्चों के लिए सुरक्षित साइबर स्पेस और साइबर नियमों की अधिव्यक्ति करना ताकि उन्हें शिक्षाप्रद और नीति निर्माण की चर्चाओं में भाग लेने के लिए उपयुक्त जानकारी और अवसर उपलब्ध हों और साथ ही साइबर अपराधों के जोखिम को कम करने के लिए नियंत्रण और संतुलन लाया जा सके तथा

•             न्यायिक और प्राशासनिक कार्यवाही में बच्चों की सुनवाई सुनिश्चित कराने के लिए बच्चों के अनुकूल संरचनाओं, तंत्रों और प्रक्रियाओं को सुनिश्चित करना।

 

4.    बाल अधिकार अभियान एवं प्रोत्साहन

 

•             बच्चों के अधिकारों के प्रोत्साहन व सुरक्षा के लिए जनसंचार माध्यमों का अभिनव प्रयोग करना तथा अभियान चलाना;

•             सबसे संवेदनशील और वंचित तबकों के बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं बच्चों और उनके समुदायों के लिए पुरस्कार, सराहना, प्रशस्तिया¡, प्रशंसा पत्रा आदि आरंभ करना/ स्थापित करना; तथा

•             राष्ट्रीय एवं विश्व बाल दिवस, बाल मजदूरी विरोधी दिवस, अंतर्राष्ट्रीय बाल उत्पीड़न निषेध दिवस, अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस, अंतर्राष्ट्रीय विकलांग दिवस, अंतर्राष्ट्रीय बाल व्यापार निषेध दिवस आदि महत्वपूर्ण अवसरों पर जागरूकता अभियान और कार्यØमों का आयोजन करना।